Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika 2023

अस्सलामुअलैकुम दोस्तों आज की इस पोस्ट में आप जानेगें Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika, Salatul Tasbeeh Namaz Padhne Ka Tarika, Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Time, Salatul Tasbeeh Ki Niyat  को बिल्कुल आसान भाषा में तो चलिए जानते हैं सलातुल तसबीह की नमाज़ का तरीका

नफिल नमाजों में Salatul Tasbeeh बहुत बड़ी नमाज हैं। जिसकी बड़ी अहमियत और बहुत ज्यादा सवाब हैं। हुजुर अकरम सल्लाहू अलैहे व सल्लम ने अपने चाचा हजरत अब्बास रजी अल्लाह ता’अल अन्हो को इस नमाज़ की तरगीब फरमाई।

इस नमाज़ के पढने से अल्लाह ता’अला पढ़ने वाले के अगले पिछले, नए पुराने, गलती से और जान बुझ कर किए हुए, छोटे बड़े और जाहिरी और पुशिदाह गुनाह बख्स दिया जाता है यानि माफ़ कर दिया जाता है। Salatul Tasbeeh Ki Namaz एक नफिल नमाज़ है, और ये पांच वक्‍तों की नमाज़ में शामिल नहीं है।

सलातुल तस्बीह क्या है?

सलात का मतलब नमाज़ होता है और तस्बीह का मतलब कोई आयात का विरद करना और Salatul Tasbeeh Ki Namaz बाकि नमाजो से बिलकुल अलग है क्युकी इसमें नमाज़ के साथ तस्बीह पढ़ा जाता है इसीलिए सलातुल तसबीह की नमाज़ को सलातुल तस्बीह के नाम से जाता है। 

यह नमाज़ नबी सल्लाहू अलैहे वसल्लम ने हम लोगो को खुद पढने के लिए बोला है इस हिसाब से इसकी बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है और जो सख्स इस नमाज़ को पढ़ता है तो उसका पिछला और अगला सारी गुनाह माफ़ हो जाता है।

Salatul Tasbeeh ki Namaz Ka Time

Salatul Tasbeeh Ki Namaz एक नफिल नमाज़ है वैसे तो नफिल इबादत के लिए कोई भी मुकरर वक़्त नहीं होता है लेकिन इस नमाज़ के लिए बेहतर वक़्त जोहर से पहले होता है। 

मगर मकरूह वक्तो में यह नमाज़ पढने से परहेज़ करे क्युकी इन मकरूह वक्तो में नफिल इबादत या कोई भी इबादत नहीं करना चाहिए। 

सूरज निकलते वक़्त, जवाल के समय यानि 11:30 से 12:30 तक, सूरज डूबता वक़्त ये तीनो टाइम पढना मकरूह है. इसके अलावा आप इस नमाज़ को रात हो या दिन हो जब आपका समय मिले आप पढ़ सकते है।

Salatul Tasbeeh Namaz Ki Niyat

वैसे हम सब को मालूम है की किसी भी नमाज़ पढ़ने से पहले नियत करते है और ये जरुरी होता है। आपको ये मालूम होना चाहिए की हर Namaz ki Niyat अलग अलग होती है वैसे ही नफिल नमाज़ की नियत भी अलग होती है क्युकी नियत से ही मालूम होता है की आप कौन सी नमाज़ पढ़ रहे है।

Tasbeeh ki Niyat in Arabic:

نَوَايْتُ اَنْ اُصَلِّىَ لِلَّهِ تَعَالَى ارْبَعَ رَكَعَاتِ صَلَوةِ التَّسْبِيْحِ سُنَّةُ رَسُوْلِ اللَّهِ تَعَالَى مُتَوَجِّهًا اِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيْفَةِ اَللَّهُ اَكْبَرُ

Salatul Tasbeeh ki Niyat in URDU:

نیت کی میں نے چار رکعت صلوٰۃ التسبیح کی، واسطے اللہ تعالیٰ کے منھ میرا کعبہ شریف کی طرف۔

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Salat ul Tasbeeh ki Niyat in Hindi:

नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज सलातुल तस्बीह की नफिल वास्ते अल्लाह ताआला के रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहू अकबर

Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika

यह नमाज़ पढने के लिए जरुरी नहीं है की मस्जिद में ही जाकर पढ़े आप किसी भी जगह पर Salatul Tasbeeh ki Namaz  पढ़ सकते है लेकिन वह जगह पाक साफ होना चाहिए।

  • पहला – खड़े होते ही तस्‍बीह 15 बार
  • दूसरा – सूरत मिलाने के बाद तस्‍बीह 10 बार
  • तीसरा – रुकूअ् में तस्‍बीह 10 बार
  • चौथा – क़याम यानि खड़े होने पर तस्‍बीह 10 बार
  • पांचवा – सजदे में तस्‍बीह 10 बार
  • छठवा – जलसा में तस्‍बीह 10 बार
  • सातवां – दूसरे सजदे में तस्‍बीह 10 बार

अच्छी तरह से वजू करे फिर पाक साफ़ कपड़ा बिछा कर क़िबला की तरफ खड़े हो जाने के बाद नियत करे नियत का तरीका ऊपर बताया गया है।

सलातुल तसबीह की पहली रकात

Salatul Tasbeeh ki Namaz की पहली रकात इस नमाज़ का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाग है, जो हमने  नीचे बिल्कुल आसान भाषा मे बताया है-

सबसे पहले आप Salatul Tasbeeh ki Namaz in Hindi की शुरुवात करते हुए, खड़े जो जाएं और नियत करें। 

फिर यह पढ़ें- नियत करता या करती हूं, मै चार नफ़्ल नमाज़ सलातुल तस्बीह वास्ते अल्लाह ताला के रुख मेरा काबे शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।

इसके बाद आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ बांध लें, और सना पढ़ने की शुरुवात करें।

” सना- सुब हनकल लहुम्मा व बिहमदिका व तबा रकसमुक़ा व ताला जद दुका वला इलाहा गयरुक “।

इस के बाद आपको ऊपर दी गयी खास तस्बीह को 15 बार पढ़ना है।

फिर आपको यह पढ़ना है- ” अउ जु बिल्लाहि मि नस शयता निर रजिम फिर बिस्मिल्लाह हिर रह्मानिर रहीम “

इसके बाद आपको सूरह फातिहा पढ़ना शुरू करना है, अगर आपको सूरह फातिहा याद नहीं है, तो ऊपर दी गयी खास तस्बीह को 10 बार पढ़ना है।

जब आप सूरह फातिहा पढ़ लेते हैं, तब आपको रकु करना है। रकु करते समय तीन बार सुब्हान रबियाल अजीम आपको पढ़ना है। इस के बाद आपको ऊपर दी गयी खास तस्बीह को 10 बार पढ़ना है (Salatul Tasbeeh ki Namaz ka Tarika).

जब आप ऊपर दी गयी दुआ को पढ़ लें, तब फिर आपको समी अल लाहु लीमन हमीद कहते हुए 10 बाद तस्बीह पढ़नी है, और फिर सीधे अपनी जगह पर खड़े होकर सजदे में जाना है। उसके बाद आपको अल्लाहु अकबर कहकर तीन बारी सुबहाना रब बियल आला बोलना है। इसको पढ़ने के बाद आपको और दस बार तस्बीह पढ़नी है।

सजदा करने के बाद बैठ जाएं, और 10 बारी तस्बीह पढ़ें। और फिर दूसरे सजदे के लिए जाएं और 10 बारी दुआ फिर पढ़ें।

इसके बाद आप को अल्लाहु अकबर कहते हुए अपनी जगह में खड़े हो जाना है। यह रकात पूरी हुई। और इस रकात में अपने कुल मिलाकर 75 बार तस्बीह की दुआ पढ़ी।

सलातुल तस्बीह की दूसरी रकात

दूसरी रकात में सना नहीं पढना है सबसे पहले 15 बार तस्बीह पढ़े फिर अलहम्दो शरीफ और सूरत मिलाये इसके बाद रुकू में जाने से पहले 10 मर्तबा तस्बीह पढ़े।

रुकू में जाने के बाद तिन मर्तबा सुबहाना रब्बियल अज़ीम कहे फिर रुकू में रहते हुए 10 बार तस्बीह पढ़े। समिल्लाहु लिमन हमीदा कहते हुए खड़े हो जाये फिर खड़े रहते हुए ही रब्बना लकल हम्द कहे फिर इसी हालत में 10 मर्तबा तस्बीह पढ़े।

इसके बाद सजदा में जाए और दोनों सजदा के दरमियाँ 10 10 बार तस्बीह पढ़े. आपको ध्यान देना है की पहला सजदा करने के बाद जब आप उठते है और दूसरी सजदा में जाते है तो दूसरी सजदा में जाने से पहले फिर 10 बार तस्बीह पढना है।

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सजदा के बाद दोनों पंजो पर बैठ जाए और तशाहुद पढ़े यानि अत्तःहियत पढ़े फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए तीसरी रकात के लिए खड़ा हो जाए।

सलातुल तस्बीह की तीसरी रकात

तीसरी रकात भी पहली रकात की तरह पढ़ना है जिसमे सबसे पहले 15 बार तस्बीह पढ़े फिर अलहम्दो शरीफ और कोई सूरत मिलाये और रुकू में जाने से पहले 10 बार तस्बीह पढ़े।

रुकू में जाने के बाद सुबहाना रब्बियल अज़ीम और 10 तस्बीह समिल्लाहु लिमन हमीदा कहते हुए खड़ा हो जाए फिर रब्बना लकल हम्द और 10 तस्बीह फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए सजदा में जाए।

सजदा में जाने के बाद सुब्हान रब्बि यल आला और 10 बार तस्बीह पढ़े फिर बैठ जाए और 10 तस्बीह पढ़े इसके बाद दुसरे सजदा में जाए और तिन बार सुब्हान रब्बि यल आला और 10 तस्बीह पढ़े। फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए चौथी रकात के लिए खड़ा हो जाए।

सलातुल तस्बीह की चौथी रकात

चौथी रकात भी तीसरी रकात की तरह एक जैसी ही पढना है जिसमे अलहम्दो से पहले 15 तस्बीह फिर सूरत मिलाने के बाद 10 तस्बीह।

रुके में रहते हुए 10 तस्बीह रुकू से खड़े होते हुए 10 तस्बीह इसके बाद पहला सजदा में 10 तस्बीह फिर जलसा के दरमियाँ 10 तस्बीह फिर दुसरे रकात में 10 तस्बीह।

फिर दोनों पंजो पर बैठ जाए और अतःहियात, दरुदे इब्राहीम और दुआ इ मशुरा पढने के बाद दोनों तरफ सलाम फेर दे।

इस तरह से आपकी Salatul Tasbeeh ki Namaz सुन्नत तरीके से मुकम्मल हो गयी।

सलातुल तस्बीह की नमाज की दुआ

हजरे इब्ने अब्बास र.अ. से अत्ताहियात के बाद सलाम से पहले ये दुआ पढ़ना रिवायत हैं। अगर कोई पढ़ सके तो बेहतर हैं और याद न हो तो छोड़ने में भी कोई हर्ज नहीं। सलातुल तस्बीह की दुआ इस प्रकार हैं-

अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका तऊफीका आहलिल हुदा वाआमाला आहालल यकीनी वमाना सहाता आहलित तऊवति वाअजमा अहलिस्सबरी वजिद्दा अहलिल खसियती वतलावा अहलिल रगवति. वताअब्बुदा अहलिल वराई. वइरफाना अहलिल इलमी हत्ता अखाफका अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका मखापतन तहाजुजूनी अम्मासिका हत्ता आमला विताअतिका अमलन असतहिक्कुविही रिदाका वहत्ता अनासिहाका वित्तउवति खऊफन मिनका वहत्ता उखलिसा लकन नसीहता हुब्बल लका वहत्ता अतावक्कला अलैइका फिलऊमूरी हुसना जन्निम बिका सुब्हाना खालिकिन्नूर

सलातुल तस्बीह की नमाज की दुआ का तर्जुमा हिंदी में

ऐ अल्लाह मैं तुझसे हिदायत वालों की तरह तोफीक माँगता हूँ और यकीन वालों के अम्ल, तौबा वालों का खुलून, साबिरीन की पुख्तगी, डरने वालों की कोशिश, रगवत वालों की तरह तलब, परहेज गारों की तरह इबादत, ताके मैं तुझसे डरने लगूँ. 

ऐ अल्लाह मैं तुझसे ऐसे खौफ के बारे में तेरी बारगाह में अर्ज करता हूँ जो तेरी नाफरमानी से रोक दें। ताकि मैं तेरी इताअत से ऐसे अम्ल करने लगूँ जिनसे तेरी रज़ा और खुशनूदी का मुस्तहक बन जाऊँ। और ताके खुलूस की तौबा तेरे डर से करने लगूँ। और ताके मैं मुफलिल हो जाऊँ। और तुझसे मौहब्बत करने लगूँ ताके तेरे साथ हुस्ने जन की वजह से तुझपर भरोसा करने लगूँ।

Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ki Fazilat

हदीसे पाक से पता चला नफिल नमाजों में सलातुल तस्बीह का एक खास मकाम हैं। जिसे हमारे नवी ने तोहफा और खुशखबरी फरमाया हैं। Salatul Tasbeeh Ki Namaz बहुत ही अहमियत वाली नमाज हैं। इसकी बड़ी फजीलत और बड़ा सवाब हैं। 

हज़रते अब्दुल्ला इब्ने अब्बास र.अ. से रिवायत हैं। कि रसूल अल्लाह स.अ.व. ने एक दिन अपने चचा हजरते अब्बास र.अ. से फरमाया ऐ मेरे चचा कि मैं आपको एक ऐसा अम्ल बताऊँ जिससे आपको 10 फायदें हासिल होंगे। जब आप उसको करेंगें तो अल्लाह तआला आपके सारे अगले पिछले गुनाफ माफ फरमादेगा। और वो अम्ल सलातुल तस्बीह हैं। और इसका तरीका ये हैं कि आप 4 रकात नमाज अदा करें।

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Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika For Ladies

Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika आदमी और औरत सभी के लिए एक समान हैं। Salatul Tasbeeh Ki Namaz में औरतों के लिए अलग से कोई खास तरीका नहीं बनाया गया हैं। इसलिए मर्द और औरतें दोनों इसी तरीके से Salatul Tasbeeh ki Namaz अदा करेंगी और अल्लाह ताआला से अपने मग्फेरत के लिए दुआ करे।

सलातुल तस्बीह की नमाज़ पढ़ने के फायदे

दोस्तों हर नमाज को किसी न किसी खास फायदे और खुदा की रहमत पाने के लिए ही पढा जाता है, ऐसे में हर नमाज़ के अपने अपने फायदे हैं, Salatul Tasbeeh ki Namaz के भी अपने कुछ फायदे हैं। इनमे से कुछ मुख्य फायदे हमने नीचे बताए हैं, जिनकों पढ़कर आप इस नमाज़ को सही से समझ सकते हैं।

अल्लाह सुबान व ता’अला ने हर नमाज़ को खास रहमत और बरकत के लिए बनाया है पांच वक़्त की नमाज़ के अलावा बहुत ऐसे भी नमाज़े है जिनसे अल्लाह ता’अला पढने वाले को बहुत देते है.

इसी तरह Salatul Tasbeeh ki Namaz है जिसका फ़ज़ीलत और फायदे बे इन्तहा है जो कुछ यु है:

इस नमाज़ को पढ़ने का सबसे बड़ा उददेश्य खुदा की रहमत पाने के लिए पढा जाता है। इस नमाज़ को पढ़ कर खुदा की रहमत पा सकते है।

आपके घर में बरकत नहीं हो रहा है उपर जो तस्बीह बताया हूँ अगर कोई उस तस्बीह को पढ़ना शुरू कर दे तो उसके घर में बरकत होने लगा जाता है।

अगर आप बिज़नस कर रहे है या जॉब कर रहे है और कोई काम रुक गया है पूरा नहीं हो पा रहा है तो आप Salatul Tasbeeh ki Namaz को रोजाना पढने से रुके हुए काम में वृद्धि होने लगता है।

इस नमाज को पढ़ने का हुकुम हमारे नबी ने दिया है, इसलिए यह हमारे लिए किसी भी फजीलत से बढ़कर है।

जो शख्स इस नमाज को पढेगा तो इस नमाज की बरकत और रहमत से उसके तमाम अगले और पिछले गुनाह माफ हो जाएंगे।

अगर आपकी कोई चाहत है या आप किसी तकलीफ से घिरे हुए हैं, तो आप इस नमाज को पढ़ें इंशाअल्लाह आपको उस परेशानी का हल मिल जाएगा।

आप सिर्फ दुआ करे और अल्लाह ताआला पर छोड़ दे इंशाअल्लाह आपकी दुआ जरुर काबुल होगी।

सलातुल तस्बीह की नमाज़ भूल जाएँ तो क्या करें

अगर किसी सख्स ने पहली या दूसरी तीसरी चौथी रकात में जितना तस्बीह पढना था उतना नहीं पढ़ा और भूल गया तो उसको चाहिए की अगली रकात में ज्यादा पढ़ ले।

क्युकी हम सब इन्सान है और इन्सान से गलती हो जाती है लेकिन आपको यकीन पर भरोषा करना चाहिए मसलन नमाज़ में 15 तस्बीह पढना था लेकिन वह भूल गया लेकिन वह कंफ्यूज की 10 पढ़ा हूँ या 15 तो यहाँ पर 10 पर उसको यकीन है 15 में सक है इसीलिए यकीन पर भरोषा करे।

Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika FAQs

प्रश्न: सलातुल तस्बीह कितने बजे करना चाहिए?

उत्तर: तसालुत तस्बीह की नमाज मकरूह वक्तों को छोड़कर हम किसी भी समय अदा कर सकते हैं, क्योंकि यह एक नफिल नमाज हैं। मगर बेहतर ये है कि Salatul Tasbeeh ki Namaz जोहर की नमाज से पहले अदा की जायें।

प्रश्न: सलातुल तस्बीह की नमाज़ सुन्नत है या नफिल?

उत्तर: सलातुल तस्बीह की नमाज़ नफिल है सुन्नत नमाज़ सिर्फ पांचो वक्तो की नमाज़ में पढ़ा जाता है।

प्रश्न: सलातुल तस्बीह की नमाज में कितनी रकात होती है?

उत्तर: तलातुल तस्बीह की नमाज में 4 रकात होती हैं। इसको 2-2 रकात करके भी पढ़ सकते हैं, लेकिन बेहतर तरीका हैं, 4 रकात नमाज एक ही बार में पढ़ी जायें।

आज आपने क्या सीखा

दोस्तों आज की इस पोस्ट में आपने Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika के बारे में बिल्कुल आसान भाषा में सीखें की कोशिश की हमें उम्मीद है कि आपको हमारी कोशिश से कुछ मदद जरुर मिली होगी। अगर आप सलातुल तस्बीह की नमाज पढ़ने का तरीका अच्छे से समझ पाए हैं, तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर जरूर करें।

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