Namaz Padhne Ka Tarika Step by Step 2023

जैसा की हम सबको मालूम ही है की नमाज, मुसलमानों के लिये कितनी जरूरी है। आपकी कमाई हुई सारी दौलत शोहरत, यहीं दुनिया में ही रह जायेगी, अगर आपके साथ कुछ जाएगा तो वो है, आपकी नमाज। वही आखरी समय में आपके साथ जायेगी।

पांच वक़्त की नमाज़ हर मुस्लमान भाई-बहन के  लिए ज़रूरी है। चाहे आप जिस भी हाल में हों नमाज़ छोड़ना जाएज़ नहीं माना जाता है। आपको जानकर ख़ुशी होगी कि नमाज को जन्नत की कुंजी कहा जाता है।

तो अगर आप नमाज पढ़ते हो, तो आपको ये पता होना चाहिए की असल मे नमाज पढ़ने का सही तरीका क्या है ?

तो आज के इस लेख में हम आपको यही बताने वाले है, कि नमाज पढ़ने का सही तरीका क्या है ? तो सबसे पहले जानते हैं Namaz Padhne Ka Tarika Step by Step.

Table of Contents

नमाज़ क्या है?

नमाज़ या सलाह, यह एक फ़ारसी शब्द है, जो उर्दू भाषा में “नमाज” का पर्याय (synonymous) है। कुरान शरीफ में सलात शब्द बार-बार आया है और प्रत्येक मुसलमान स्त्री और पुरुष को नमाज पढ़ने का आदेश दिया गया है। इस्लाम के आरंभकाल से ही नमाज को पढ़ने का आदेश है।

नमाज़ पढने की सही उम्र क्या है?  

आपको बता दें कि हर वो इंसान जिसने कलमा पढ़ा है और जिसकी उम्र 7 वर्ष से ज्यादा है, उस हर मुसलमान भाई बहन को नमाज़ करना जरुरी है। 

कोई भी मुसलमान जो दुनिया के काम काज के वजह से नमाज़ को छोड़ देता है, वह अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के नज़रिये से गुनहगार है।

फ़र्ज़ नमाज़ के प्रकार

दोस्तों शायद ही कोई मुसलमान भाई बहन ऐसा होगा जिसे ये पता न हो की फ़र्ज़ नमाज़ पांच तरह की होती हैं जो दिन के कई हिस्से में पढ़ी जाती हैं। 

  1. फज़र की नमाज़ (सुबह 5 बजे पढ़े जाने वाली नमाज़ )
  2. ज़ुहर की नमाज़ (जो दोपहर 1 बजे पढ़ी जाने वाली नमाज़)
  3. असर की नमाज़ (जो शाम को 5 बजे पढ़े जाने वाली नमाज़)
  4. मगरिब की नमाज़ (जो रात को 6 बजे पढ़े जाने वाली नमाज़)
  5. ईशा की नमाज़ (जो रात को 8 बजे पढ़ी जाने वाली नमाज़)
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नमाज़ के फराएज

आपको बता दे कि नमाज़ की कुछ शर्ते हैं। जिनको पूरा किये बिना नमाज़ पूरी नहीं मानी जाती। इसलिए इसलिए इन शर्तो का नमाज़ के लिए पूरा करना
ज़रूरी है, जिससे नमाज का पूरा सवाब मिले और जन्नत नसीब हो।

1. बदन का पाक होना जरुरी

नमाज पढ़ते के लिए आपके बदन का पाक होना जरूरी है, पाक होने का अर्थ है – आप नापाकी की हालत में न हो। अगर आप नापाक है, तो पहले अपने आप पाक करें फिर गुसल करें उसके बाद ही न,नमाज अदा करें।

2. आप के कपड़ो का पाक होना जरुरी

नमाज के लिए जितना जरूरी बदन यानी हमारे शरीर का पाक होना जरूरी है, उतना ही जरूरी हमारे कपड़ो का भी पाक होना जरूरी है, तो जब आप नमाज पढ़ने जाए तो साफ सुधरे कपड़े पहन कर जाए और अल्लाह के सजदे में नमाज अदा फरमाएं।

3. नमाज़ पढने की जगह का पाक होना जरुरी

जितना जरूरी बदन और कपड़ो का पाक होना है उससे भी ज्यादा जरूरी है कि आप जिस जगह पर नमाज पढ़ रहे वह जगह पाक होना। अगर आपके आस पास मस्जिद है तो आप को मस्जिद में ही नमाज के लिए जाना चाहिए। लेकिन अगर आप किसी ऐसी जगह रहते हैं जहाँ से मस्जिद काफी दूर है तब आपको एक बात का ध्यान देना जरूरी है कि जब आप नमाज पढ़े तो वो जगह साफ होने चाहिए ।

4. बदन के सतर का छुपा हुआ होना

बदन के सतर का मलतलब होता है नाफ़ के निचले हिस्से से घुटने तक के हिस्से को बदन के सतर कहा जाता है। अगर मर्द का ये हिस्सा खुला है या दिख रहा तो आपकी नमाज नहीं मानी जाएगी।

5. नमाज़ का वक्त होना

जैसे कि जानते है कि इस्लाम मे पांच वक्त की नमाज मुकमल है इसे आपको समय पर अदा करनी होती हैं जब आप किसी नमाज की वक्त गुजरने के बाद उसे अदा करते हैं तो उसे कजा नमाज कहा जाता है।

6. किबले की तरफ मुह होना

जब आप नमाज पढ़ रहे हो तो आपको ये पता होना चाहिये कि किबला किधर है किबला का मतलब है पश्चिम की तरह आपका सर् होना चाहिये। इसलिए जब आप नमाज पढ़ो तो ये सुनिश्चित कर लें, कि आपका सिर किबला यानी पश्चिम की तरफ जरुरी है।

नमाज़ पढ़ने का सही तरीका

नमाज पढने के लिए आपको ये पता होना जरुरी है की नमाज पढने का सही तरीक क्या है और नमाज पढने से पहले आपको क्या क्या करने की जरूरत होती है तो चलिये देखते है नमाज पढने का सही तरीका 

1. नमाज़ के लिए वज़ू करना

नमाज़ को पढ़ने के लिए वजू करना ज़रूरी है। अगर आप गुस्ल करके आ रहे हैं तो सिर्फ दोनों हाथ को कलाई तक धोकर फिर तीन बार कुल्ली कर लेंगे तो आपका वजू हो जायेगा । ग़ुस्ल करने का सही तरीका ।

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वजू करने का सही तरीका।

दोनो हाथ की कलाइयों से कोहनी को तीन बार अच्छे से धोना धुएं।

तीन बार मुंह भर कर कुल्ली करना।

तीन बार नाक में पानी डालना।

तीन बार मुंह को दोनों कानों के तलो तक धोना।

सर मसाह करना।

दोनों पैर को एड़ी तक धोना।

ध्यान रहे वजू के बीच यह पढ़े।

2. नमाज़ की नीयत की दुआ पढ़ना

इन्नी वाज्जःतु वजहिया लिल्लज़ी फतरसामावाती वलअर्ज़ा हनी -फ़ो -व- वमा आना मिनल मुशरिकीन

3. नमाज़ की नीयत करना।

नीयत दिल से इरादे से कहने को कहते हैं । हर नमाज़ की नीयत करना ज़रूरी।

नमाज़ की नीयत करने का तरीक़ा

हर नमाज़ की नीयत करने का तरीक़ा लगभग एक ही जैसा होता है। बस आप जिस वक्त की नमाज़ पढ़ रहे हैं उस नमाज़ का नाम लेना, सुन्नत पढ़ रहे हैं या फिर फर्ज उसकी नीयत करना।

अगर आप ज़ुहर की फ़र्ज़ नमाज़ की नीयत करेंगे तो ऐसे करेंगे। नीयत करता हु मैं 4 रकअत नमाज़ ए फ़र्ज़ वक़्त ज़ुहर, रुख मेरा काबा शरीफ (क़िब्ला) की तरफ, पीछे इस इमाम के, वास्ते अल्लाह टाला के, अब अल्लाहु अकबर कहकर दोनों हाथ को कानो तक उठाकर बांध लेंगे। 

4. सना दुआ पढ़े

सुब्हान-कल्ला हुम्मा व बिहम्दिका व तबा-रा-कस्मुका व तआला जद्दु-का वलाइलाहा ग़ैरुक।

5. तअव्वुज, तस्मियाह पढ़े

1. अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रज़ीम 

2. बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम .

6. सूरह फातिहा पढ़े।

  • अल्हम्दुलिल्लहि रब्बिल आलमीन  
  • अर रहमा-निर-रहीम 
  • मालिकि यौमिद्दीन 
  • इय्याका न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  • इहदिनस् सिरातल मुस्तक़ीम 
  • सिरातल लज़ीना अन अमता अलय हिम 
  • गैरिल मग़दूबी अलय हिम् वलज़्ज़ाल्लीन (आमीन)।

7. क़ुरान शरीफ की सूरह पढ़े।

आप चाहे तो क़ुरान शरीफ की सूरह पढ़े या फिर चारो कुल या फिर नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सूरत पढ़े।

8. रुकू में झुक जाये।

अल्लाहु अकबर (तकबीर) कहकर रुकू में झुक जाये। उसके बाद तीन या 5 मर्तबा सुबहान रब्बीअल अज़ीम कहें। उसके बाद समीअल्लाहु लिमन हामिदा कहते हुवे रुकू में से खड़े हो जाये। खड़े होने के बाद एक बार रब्बना लकल हम्द कहें।

9. सज़दा करें।

अल्लाहु अकबर (तकबीर) कहते हुए सज़दे में चले जाये। सज़दे में रहते हुए तीन या पांच मर्तबा सुबहान रब्बीअल आअला कहें।

10. सज़दे के दरमियान

उसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए सज़दे में से बैठ जाये। उसके बाद सज़दे के दरमियान की दुआ पढ़ें। जोकि यह है अल्लाहुम्मग्फिरली वरहमनी वहदीनी वअ-फिनी वरज़ुक-नी वज़बुर-नी वर्फा-नी फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए सज़दे में चले जाये। सज़दे में रहते हुए सुबहान रब्बीअल आअला कहें , फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए सज़दे से खड़े हो जाये।

अब आप की एक रकअत नामा पूरी हो गयी दूसरी रकअत में में खड़े होने के बाद 5 से 9 स्टेप को फिर से फॉलो करें। उसके बाद सज़दा पूरा करने के बाद बैठ जाये।

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11. अत्तहिय्यात (तशहुद) पढ़ें।

अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु अस्सलामु अलैका अय्युहन-नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व ब-रकातुहू अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्ला हिस्सालिहीन अशहदु अल्ला इला-हा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।

12. दरुदे इब्राहीम (शरीफ) को पढ़े।

अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव वअला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहि-म इन्न-क हमीदुम्मजीद । अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारकता अला इब्राहिमा व अला आलि इब्राहि-म इन्नका हमीदुम्मजीद ।

13. दुआ ए मसुरा पढ़े

अल्ला हुम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी ज़ुलमन कसीरंव वला यग़्फिरुज़-जुनूब इल्ला अन-त फ़गफ़िरली मग़-फिरतम मिन इनदिका वर-हमनी इन्नका अन्तल गफ़ुरुर्रहीम।

दुआ ए मासुरा को पढ़ने के बाद पहले दाहिनी तरफ मुँह फेरते हुए अस्सलामु अलैकुम वरह मतुल्लाह फिर बाए तरफ मुँह फेरते हुए यह पढ़े।

अब आप की दो रकअत नमाज़ पूरी हो गयी है इसके बाद आयतल कुर्सी पढ़ें फिर दुआ मांगे या तस्बीह पढ़े 100 मर्तबा -: सुबहानअल्लाह 33, अल्हम्दुलिल्लाह 33, अल्लाहु अकबर 34 मर्तबा पढ़े।

अज़ान की दुआ

अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर

अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर

अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लला

अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लला

अशहदु अन्न मुहम्मदुर्रसुल अल्लाह

अशहदु अन्न मुहम्मदुर्रसुल अल्लाह

हैंय्या अलस सल्लाह

हैंय्या अलस सल्लाह

हैंय्या अलल फलाह

हैंय्या अलल फलाह

अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर

ला इलाहा इल्ललाह

अज़ान के बाद की दुआ

“अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़ीहिल दावती-त-ताम्मति वस्सलातिल कायिमति आती मुहम्मद नील वसिलता वल फ़ज़ीलता अब’असहू मक़ामम महमूद निल्ल्जी अ’अत्तहू”

यह दुआ अज़ान होने के बाद पढ़े. इसका मतलब है, “ऐ अल्लाह! ऐ इस पूरी दावत और खड़े होने वाली नमाज़ के रब मुहम्मद को ख़ास नजदीकी और ख़ास फजीलत दे और उन्हें उस मकामे महमूद पर पहुंचा दे जिसका तूने उनसे वादा किया है, यकीनन तू वादा खिलाफी नहीं करता।”

नमाज़ की कुछ सूरह

यूँ तो क़ुरआन की हर सूरह नमाज़ में पढ़ी जा सकती है, लेकिन हम यहाँ सिर्फ 5 ही सूरतों का ज़िक्र कर रहे है जो बोहोत ही आसान है जिसको आप नमाज के समय में पढ़ सकते है 

सुरः फातिहा:

अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन. अर्रहमान निर्रहीम. मालिकी यौमेद्दीन. इय्याका नाबुदु व इय्याका नस्तईन. इहदिनस सिरातल मुस्तकीम. सिरातल लजिना अन अमता अलैहिम, गैरिल मग्ज़ुबी अलैहिम वला ज़ाल्लिन। 

सुरः फातिहा: तर्जुमा हिंदी 

अल्लाह के नाम से जो बड़ा ही मेहरबान और रहम करने वाला है। प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहान का रब है। बड़ा ही मेहरबान और दया करने वाला है।

सुरः इखलास:

कुलहु अल्लाहु अहद. अल्लाहु समद. लम यलिद वलम युअलद. वलम या कुल्लहू कुफुअन अहद। 

सुरः इखलास: तर्जुमा हिंदी  

कह दीजिए कि वह अल्लाह और एक है। सुरह – अल्लाहुस समद। तर्जुमा – कह दीजिए अल्लाह अबदी मुतअल्लिक और बेनियाज़ है। सुरह – लम यलिद वलम यूलद।

सुरः फ़लक:

कुल आउजू बिरब्बिल फ़लक. मिन शर्री मा खलक. व मिन शर्री ग़ासिक़ीन इज़ा वक़ब. व मिन शर्री नफ्फासाती फिल उक़द. व मिन शर्री हासिदीन इज़ा हसद। 

सुरः फ़लक: तर्जुमा हिंदी 

कह दीजिये की मैं सुबह के रब की पनाह चाहता हूँ। तमाम मख़लूक़ात के शर से।

और अँधेरी रातो के शर से जब कि उस की तारीकी फ़ैल जाये। और उन सभी औरतों के शर से जो लोग गिरहों में फूंक मारती है। और हसद करने वाले के शर से जब वो हसद करने लगे।

सुरः नास:

कुल आउजू बिरब्बिन्नास. मलिकीन्नास. इलाहीन्नास. मिन शर्रिल वसवासील खन्नास. अल्लजी युवसविसू फी सुदुरीन्नास. मिनल जिन्नती वन्नास। 

सुरः नास: तर्जुमा हिंदी 

कहो कि मैं इन्सानों के परवरदिगार की पनाह में आता हूँ। जो सारे इन्सानों का मालिक है। जो सारे इन्सानों का माबूद है। वस्वसा डालने वाले और छुप जाने वाले के बुराई शर से।

सुरः कौसर:

इन्ना आतय ना कल कौसर, फसल्लि लिरब्बिका वन्हर, इन्ना शानिअका हुवल अब्तर। 

सुरः कौसर: तर्जुमा हिंदी 

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम बाला है। बेशक आपका दुश्मन बे नामो निशान होगा।

निष्कर्ष

तो दोस्तों, आज आपने सीखा Namaz Padhne Ka Tarika Step by Step हमने पूरी कोशिश की आपको सरल भाषा में समझा पाए ताकि आप नमाज पढ़ने का सही तरीका सीख पाए और अल्लाह की आपको रहमत मिल पाए आपको ये लेख कैसा लगा हमें अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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