Ghusl Ki Dua | ग़ुस्ल की दुआ हिंदी में

Ghusl Ki Dua: अस्सलामु अलैकुम दोस्तों आज के इस लेख में हम ग़ुस्ल करने की दुआ के बारे में जानने वाले हैं। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनको ग़ुस्ल करने के दुआ के बारे में मालूम नहीं है या फिर ग़ुस्ल करने का सही तरीका नहीं मालूम है।

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलिहे वसल्लम फरमाते है की दीन के मामले में अगर कोई बात कहता है या कोई बताता है और सरियात में उसकी कोई बुनियाद नहीं है कोई सबूत नहीं है तो फिर उसकी बात रद खारिज कर दिया जायेगा ये हदीस बुखारी में है।

हमारे नबी सल्लाहुअलैहि वसल्लम ने अपने गुलामों को जहाँ खाने पीने, उठने, बैठने, चलने, फिरने और सोने, जागने के तरीके तक सीखा दिये हैं वही पर उनको पाकी, वुजू और गुशल के तरीके तक भी बता दिये हैं।

आपकी जात तमाम कायनात के लिए रहबर और रहनुमा हैं। हर बंदे को उसी बारगाह की तरफ लौटना हैं। हमारे नबी ने जो सफाई, पाकीजगी और गुस्ल का तरीका हमे बताया हैं।

ग़ुस्ल क्या है | Ghusl Ki Dua

” ग़ुस्ल ” एक अरबी भाषा का शब्द है, इसका उपयोग ज्यादातर इस्लाम धर्म के लोग अपने वार्तालाप में करते हैं। इसका अर्थ हिंदी भाषा में स्नान करना यानी कि पूरे शरीर को धोना या फिर नहाना है,और अंग्रेजी में ” Bath ” के नाम से भी जाना जाता हैं।

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जब कोई व्यक्ति अशुद्ध परिस्थिति में होता है यानी कि अपने शुद्धता को खो देता है तब वह इस्लाम धर्म में कुछ भी पाक कार्य नहीं कर सकता है। पाक कार्य करने के लिए सबसे पहले उसे ग़ुस्ल करना जरूरी है तब जाकर उस व्यक्ति की शुद्धता वापस से आती है।

ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इस्लाम धर्म में ही माना जाता है, चाहे दुनिया का कोई भी मजहब हो उस मजहब में पवित्र (पाक) काम करने के लिए आपको ग़ुस्ल करना जरूरी है।

ग़ुस्ल कब ज़रूरी होता है?

आपको मालूम होना चाहिए कि 4 चीज़ों के बाद ग़ुस्ल ज़रूरी होता है जो इस तरह हैं

हमबिस्तरी(Sex) के बाद : – जब भी आप हमबिस्तरी यानि सेक्स करते हैं तो उसके बाद ग़ुस्ल ज़रूरी हो जाता है। आप बगैर ग़ुस्ल के नमाज़ या क़ुरान नहीं पढ़ सकते।

मनी का निकलना Nightfall के बाद: – किसी भी हालत में चाहे सोने की हालत में हो या कोई और बजह, अगर मनी निकल जाती है तो ग़ुस्ल ज़रूरी हो जाता है। चाहे सो रहे हो या जाग रहे हो, मर्द और औरत दोने के लिए यही हुक्म है।

हैज़ के बाद (मासिक धर्म): – जिन चीज़ों से ग़ुस्ल वाजिब होता है उनमे से तीसरी चीज़ औरत का पीरियड (मासिक धर्म) है। जब औरत अपने पीरियड से फ़ारिग़ हो जाए तो उसे ग़ुस्ल कर लेना चाहिए। फिर नमाज़ और क़ुरान की तिलावत शुरू करें।

निफ़ास के खत्म होने के बाद: – जब बच्चा पैदा होता है तो उसके बाद औरत को जितने दिन ब्लीडिंग होती है उसे निफ़ास कहते है। उसका time 40 दिन होता है फिर उसके बाद औरत के लिए ग़ुस्ल करके नमाज़ पढ़ना ज़रूरी है।

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ग़ुस्ल करने का तरीका क्या है?

1. नीयत करना

नीयत करना यानि दिल से  इरादा करना कि निजासत से पाक होने, अल्लाह की रज़ा और सवाब के लिये नहाता हूँ न कि बदन साफ़ करने के लिये। नियत में “नहा रहा हूँ बिस्मिल्लाह हिरहमा निर्रहीम” ये कह सकते है।

2. हाथ गट्टों तक धोना

फिर अपने हांथो के गट्टों को तीन बार अच्छे से धोना और कुल्ला करें।

3. इस्तन्जे की जगह धोना

इस्तन्जे की जगह को धोयें चाहे निजासत लगी हो या नहीं।

4. बदन पर लगी निजासत धोना

बदन पर लगी निसाजत को अच्छे से साफ़ करना धोना।

5. वुज़ू करना

जैसे नमाज़ पढ़ने से पहले वजू करते है वैसे ही वजू करे लेकिन अपने पाओ को ना धुलें। हाँ अगर आप किसी ऊँचे चीज पर बैठ कर Ghusl यानि नहा रहें है तो आप अपने पाओ को भी धूल सकते है।

6. पूरे बदन पर पानी मलना

उसके बाद पुरे बदन Body पर पानी को मलना यानि के हम अपने बदन पर जैसे तेल Oil को मलते है उसी तरह पानी से भी मलें ख़ास कर सर्दियों के महीने में ऐसा जरूर करें।

7. दाहिने कंधे पर पानी डालना 

फिर आप तीन बार अपने दाहिने कंधे पर बानी डाले बहाएं।

8. बायें कंधे पर पानी डालना 

फिर आप तीन बार अपने बाएं कंधे पर पानी डाले बहाएं|

9. पूरे बदन पर पानी डालना 

फिर आप सर और पुरे बदन पर तीन बार पानी बहाएं यानि के डालें।

10. पाँव धोना

पाओं को धोएं अगर अपने वजू बनाते वक़्त अपने पाओं को नहीं धुले थे तो थोड़ा सा पीछे हट कर अपने पाओं को धुलें।

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11. पूरे बदन पर हाथ फेरना

  • फिर आप अपने बदन को साबुन से मलें या साबुन नहीं है तो अच्छे से हांथो से मल्ल लें|
  • gusl ka tarika ऊपर दिये गये तरीक़े से ग़ुस्ल करने पर मुकम्मल पाकी हासिल हो जाती है।

हमें उम्मीद है कि आपको हमारा (Ghusl Ki Dua) ग़ुस्ल करने का तरीका और गुस्ल की दुआ पोस्ट पसंद आई होगी। आपका कोई सवाल हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। 

Q.01 ग़ुस्ल का सही तरीका क्या है?

Ans. गुसल का सही तरीका यह हैं, कि सबसे पहले गुस्ल करने का दिल में इरादा करें और फिर गट्टो तक तीन बार हाथ धोयें, फिर गंदगी को धोये और फिर वुजू करें, फिर दोनों कांधों पर पानी बहायें। इस तरह से मुक्कमल तरीके से गुस्ल हो जाता हैं।

Q.02 ग़ुस्ल के कितने फ़र्ज़ होते हैं?

Ans. गुस्ल में तीन फर्ज हैं (नं.1 हाथ धोना, नं.2 कुल्ली करना, नं.3 सारे बदन पर पानी बहाना) ये तीनों फर्जो को अदा करने से मुकम्मल तौर पर गुस्ल हो जाता हैं।

Q.03 ग़ुस्ल कब जरूरी है?

Ans. इस्लाम में गुस्ल फर्ज होने की कुछ शराईते हैं, जैसे बीबी से हमविस्तरी के बाद, यौन संबन्ध बनाने के बाद, मनि के निकलने के बाद या बच्चा होने के बाद जो ब्लडिंग होती हैं के बात गुस्ल फर्ज हो जाता हैं।

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